Monday, November 17, 2025

Ramayana

  

श्री महा गणाधि पते नमः

श्री उमामहेश्वरा भ्या नमः

 

वाल्मीकि गुरुदेव के

पद पंकज सिर नाय

सुमिरे मात सरस्वती

हम पर होऊ सहाय

 

मात पिता की वंदना

करते बारंबार

गुरु जन राजा प्रजा जन

नमन करो स्वीकार

हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

जंबू द्वीपे, भरत खंडे, आर्यावरते

भारत वर्षे एक नगरी है

विख्यात अयोध्या नाम की

यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की

हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

 

रघुकुल के राजा धर्मात्मा

चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा

संतति हेतु यज्ञ करवाया

धर्म यज्ञ का शुभ फल पाया

नृप घर जन्मे चार कुमारा

रघुकुल दीप जगत आधारा

चारों भ्रातो के शुभ नामा

भरत, शत्रुग्न ,लक्ष्मण ,रामा

 

गुरु वशीष्ठ के गुरुकुल जाके

अल्प काल विद्या सब पाके

पूर्ण हुई शिक्षा, रघुवर पूर्ण काम की

हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की

 

मृदु स्वर कोमल भावना

रोचक प्रस्तुति ढंग

एक एक कर वर्णन करे

लव कुश राम प्रसंग

विश्वामित्र महामुनि राई

इनके संग चले दोउ भाई

कैसे राम तड़का मारी

कैसे नाथ अहिल्या तारी

मुनिवर विश्वामित्र तब

संग ले लक्ष्मण राम

सिया स्वयंवर देखने

पहुँचे मिथिला धाम

 

जनकपुर उत्सव है भारी

जनकपुर उत्सव है भारी

अपने वर का चयन करेगी

सीता सुकुमारी

जनकपुर उत्सव है भारी

जनक राज का कठिन प्रण

सुनो सुनो सब कोई

जो तोड़े शिव धनुष को

सो सीता पति होई

 

जो तोडे शिव धनुष कठोर

सब की दृष्टि राम की ओर

राम विनय गुण के अवतार

गुरुवर की आज्ञा सिरद्धार

सहज भाव से शिव धनु तोड़ा

जनक सुता संग नाता जोड़ा

 

रघुवर जैसा और ना कोई

सीता की समता नहीं होई

दोउ करे पराजित कान्ति कोटी रति काम की

हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की

ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की

 

सब पर शब्द मोहिनी डारी

मंत्रमुग्ध भए सब नर-नारी

यों दिन रैन जात है बीते

लव कुश ने सब के मन जीते

वन गमन, सीता हरन, हनुमत मिलन

लंका दहेन, रावण मरण, अयोध्या पुना आगमन

 

सब विस्तार कथा सुनाई

राजा राम भए रघुराई

राम राज आयो सुखदायी

सुख समृद्धि श्री घर घर आई

 

काल चक्र ने घटना क्रम में

ऐसा चक्र चलाया

राम सिया के जीवन में फिर

घोर अंधेरा छाया

 

अवध में ऐसा, ऐसा एक दिन आया

निष्कलंक सीता पे प्रजा ने

मिथ्या दोष लगाया

अवध में ऐसा, ऐसा एक दिन आया

 

चलदी सिया जब तोड़कर

सब नेह-नाते मोह के

पाषाण हृदयो में ना

अंगारे जगे विद्रोह के

ममतामयी माओ के

आँचल भी सिमट कर रह गए

गुरुदेव ज्ञान और नीति के

सागर भी घट कर रह गए

ना रघुकुल ना रघुकुल नायक

कोई ना सिया का हुआ सहायक

मानवता को खो बैठे जब

सभ्य नगर के वासी

तब सीता को हुआ सहायक

वन का एक सन्यासी

 

उन ऋषि परम उदार का

वाल्मीकि शुभ नाम

सीता को आश्रय दिया

ले आए निज धाम

रघुकुल में कुलदीप जलाए

राम के दो सूत सिय ने जाये

 

श्रोता गण जो एक राजा की पुत्री है

एक राजा की पुत्रवधू हैं

और एक चक्रवती सम्राट की पत्नी है

वही महारानी सीता

वनवास के दुखो में

अपने दिनो कैसे काटती हैं

अपने कुल के गौरवऔर

स्वाभिमान की रक्षा करते हुये

किसी से सहायता मांगे बिना

कैसे अपने काम वो स्वयं करती है

स्वयं वन से लकड़ी काटती है

स्वयं अपना धान कूटती है

स्वयं अपनी चक्की पीसती हैं

और अपनी संतान को

स्वावलंबी बनने की शिक्षा कैसे देती है

अब उसकी करुण झांकी देखिये

 

जनक दुलारी कुलवधु दशरथ जी की

राज रानी हो के दिन वन में बिताती हैं

रहती थी घेरी जिसे दास-दासी आठो यम

दासी बनी अपनी उदासी को छुपाती है

 

धरम प्रवीना सती परम कुलिना सब

विधि दोषहीना जीना दुख में सिखाती हैं

जगमाता हरी-प्रिय लक्ष्मी स्वरूपा सिया

कूटती है धान भोज स्वयं बनाती है

कठिन कुल्हाड़ी लेके लकड़िया काटती है

करम लिखे  को पर काट नहीं पाती है

 

फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था

दुख भरी जीवन बोझ वो उठाती है

अर्धांगी रघुवीर की वो धर धीर

भरति है नीर

नीर नैन में लाती है

 

जिसके प्रजाके अपवादों के कुचक्रा में

वो पीसती है चक्की स्वाभिमान बचाती है

पालती है बच्चों को वो कर्मयोगिनी के भाँति

स्वाभिमानी स्वावलंबी सफल बनाती हैं

ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते

निठुर नियति को दया भी नहीं आती है

 

उस दुखिया के राज-दुलारे

हम ही सुत श्री राम तिहारे

हो सीता माँ की आँख के तारे

लव-कुश है पितु नाम हमारे

 

हे पितु भाग्य हमारे जागे

राम कथा कही राम के आगे 


Credit:

निर्माता और निर्देशक - रामानंद सागर
सहयोगी निर्देशक - आनंद सागर, मोती सागर
कार्यकारी निर्माता - सुभाष सागर, प्रेम सागर
मुख्य तकनीकी सलाहकार - ज्योति सागर
पटकथा और संवाद - रामानंद सागर
संगीत - रविंद्र जैन
शीर्षक गीत - जयदेव
अनुसंधान और अनुकूलन - फनी मजूमदार, विष्णु मेहरोत्रा
संपादक - सुभाष सहगल
कैमरामैन - अजीत नाइक
प्रकाश - राम मडिक्कर
साउंड रिकॉर्डिस्ट - श्रीपाद, ई रुद्र
वीडियो रिकॉर्डिस्ट - शरद मुक्न्नवार



Friday, November 14, 2025

राधा कृष्ण स्तुति (Radha Krishan Stuti)



गोपालम गिरिराज राज धरनम गीता गिरर्न्तम गुरु हो

रासे स्वर रस राज राधा प्रियम्च्सी प्रेम धरम प्रभो

गोपालम गिरिराज राज धरन

द्वारिका सुपखिम्पी जययदु बरम मिरा प्रियं सुन्दर

कृष्ण वेणु करम

मयुर मुकुटम मंगल्यनाथम नुमाह


credit: Music video by Pt. Jasraj performing Shri Radha-Krishna Stuti. (C) 2001 Sony Music Entertainment India Pvt. Ltd.