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Sunday, November 30, 2025

जय दुर्गा महारानी की(Jai Durga Maharani)

 जय जयकार करो माता की,

आओ शरण भवानी की

एक बार फिर प्रेम से बोलो

जय दुर्गा महारानी की

जय दुर्गा महारानी की

 

पहली देवी शैलपुत्री है किये बैल की सवारी

चंद्रमा माथे पर सोहे

सुन्दर रूप मनोहारी

सुन्दर रूप मनोहारी

लिए कमण्डल फूल कमल के

और रुद्राक्षो की माला

हुई दूसरी ब्रह्मचारिणी

करे जगत में उजियाला

करे जगत में उजियाला

पूर्ण चंद्रमा सी निर्मल

देवि चंद्रघंटा माता

इनके सुमिरण से निर्बल भी

बैरी पर है जय पाता

बैरी पर है जय पाता

जय जयकार करो माता की,

आओ शरण भवानी की

एक बार फिर प्रेम से बोलो

जय दुर्गा महारानी की

जय दुर्गा महारानी की

 

चौथी देवी कूष्मांडा है इनकी लीला है न्यारी

अमृत भरा कलश है कर में

किये बाघ की सवारी

किये बाघ की सवारी

कर में कमल सिंह पर सिहासन

सब का शुभ करने वाली

मंगलमयी स्कन्दमाता माता है

जग का दुःख हरने वाली

जग का दुःख हरने वाली

 

मुनि कात्यान की ये कन्या

है सबकी कात्यानी माँ

दानवता की शत्रु और

मानवता की सुखदायिनी माँ

मानवता की सुखदायिनी माँ

 

जय जयकार करो माता की,

आओ शरण भवानी की

एक बार फिर प्रेम से बोलो

जय दुर्गा महारानी की

जय दुर्गा महारानी की

यही कालरात्रि देवी है महाप्रलय ढाने वाली

सब प्राणी के खाने वाले

काल को भी खाने वाली

काल को भी खाने वाली

श्वेत बैल है वाहन जिनका

तन पर श्वेतांबर भाता

यही महागौरी देवी है

सबकी जगदम्बा माता

सबकी जगदम्बा माता

 

शंख-चक्र और गदा पदम्

कर में धारण करने वाली

यही सिद्धिदात्री माता है

रिद्धि सिद्धि देने वाली

रिद्धि सिद्धि देने वाली

जय जयकार करो माता की,

आओ शरण भवानी की

एक बार फिर प्रेम से बोलो

जय दुर्गा महारानी की

जय दुर्गा महारानी की 





Credit: chitragupt
r.c.pandy
s.n.tripathi

Friday, October 25, 2024

मेरे मन के अंध तमस में, ज्योतिर्मय उतारो


 मेरे मन के अंध तमस में, ज्योतिर्मय उतारो ।

जय जय माँ, जय जय माँ ।


कहाँ यहाँ देवों का नंदन,

मलयाचल का अभिनव चन्दन ।

मेरे उर के उजड़े वन में करुणामयी विचरो ॥

नहीं कहीं कुछ मुझ में सुन्दर,

काजल सा काला यह अंतर ।

प्राणों के गहरे गह्वर में ममता मई विहरो ॥

वर दे वर दे, वींणा वादिनी वर दे।


निर्मल मन कर दे, प्रेम अतुल कर दे।

सब की सद्गति हो, ऐसा हम को वर दे॥

सत्यमयी तू है, ज्ञानमयी तू है।

प्रेममयी भी तू है, हम बच्चो को वर दे॥

सरस्वती भी तू है, महालक्ष्मी तू है।

महाकाली भी तू है, हम भक्तो को वर दे॥



Song: Mere Man Ke Andh Tamas Mein 

 lyrics sung by Jagjit Singh