आदौ
राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम् ।
वैदेहीहरणं
जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम् ।।
बालीनिर्दलनं
समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम् ।
पश्चाद्
रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम् ।।
आदौ
राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम् ।
वैदेहीहरणं
जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम् ।।
बालीनिर्दलनं
समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम् ।
पश्चाद्
रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम् ।।
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तारदे माँ..
हे शारदे माँ...
तू स्वर की देवी, ये संगीत तुझसे
हर शब्द तेरा है, हर गीत तुझसे
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तारदे माँ
मुनियों ने समझी, गुनियों ने जानी
वेदोंकी भाषा, पुराणों की बानी
हम भी तो समझे, हम भी तो जाने
विद्या का हमको अधिकार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तारदे माँ
तू श्वेतवर्णी, कमल पर विराजे
हाथों में वीणा, मुकुट सर पे साजे
मनसे हमारे मिटाके अँधेरे,
हमको उजालों का संसार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तारदे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ...